शिक्षा का हमारी जिंदगी में महत्व





शिक्षा का हमारी जिंदगी में महत्व


इस विषय पर लिखने से पूर्व में सर्वप्रथम विश्नोई समाज के संस्थापक भगवान गुरु जांभोजी को नमन करता हूं, साथ ही भगवान से सभ्य समाज में जीने का सौभाग्य प्रदान करने पर धन्यवाद प्रकट करता हूं।

शिक्षा वर्तमान युग में व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षा का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। शिक्षा को एक सीमा तक सीमित नहीं किया जा सकता है, किंतु मोटे तौर पर शिक्षा के क्षेत्र निम्न प्रकार हैं जैसे:- नैतिक शिक्षा,सामाजिक शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा, खेल शिक्षा, धार्मिक शिक्षा, आध्यात्मिक शिक्षा, मनोवैज्ञानिक शिक्षा आदि।

वर्तमान समय में गिरते सामाजिक मूल्यों एवं नैतिक पतन के दौर में शिक्षा का महत्व ओर भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। शिक्षा के माध्यम से हम विकसित समाज के निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण कर सकते हैं। वर्तमान में बिगड़ते सामाजिक-पारिवारिक रिश्तो में शिक्षा (रिश्तो की समझ) की कमी मुख्य कारण है। शिक्षा का मतलब यह कतई नहीं है कि विषय विशेष में किसी डिग्री को हासिल करना,  बल्कि शिक्षा का असली मतलब आपके द्वारा अर्जित उपाधि के संबंध में आपका ज्ञान व समझ के उच्चतम स्तर से हैं। जिस भी क्षेत्र में आप शिक्षा प्राप्त कर रहे हो, उस क्षैत्र में आप उच्चतम स्तर का ज्ञान अर्जित करने में अग्रसर नहीं हो तो आपकी शिक्षा अधूरी है।

पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के फलस्वरुप सनातन संस्कृति के आदर्श मूल्यों में कमी हो रही है। इसके अलावा सामाजिक स्तर पर अनेक सामाजिक बुराइयां (नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, बड़े बुजुर्गों के परिवारिक सम्मान में कमी, आपसी रंजिश, तलाक, हत्या आदि) एवं सामाजिक कुरीतियां (बाल विवाह, दहेज, मृत्यु भोज, सामाजिक सभाओं में नशीली वस्तुओं का प्रचलन) गंभीर विषय है। शिक्षा के माध्यम से हम इन सामाजिक बुराइयों व सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु सुसंगत तरीके से कार्य कर सकते हैं। साथ ही साथ शिक्षा के माध्यम से समाज में एक नई ऊर्जा का संचरण भी कर सकते हैं। जिससे समाज एक नई ऊंचाई को प्राप्त कर सकता है।

विश्नोई समाज के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की बात की जाये तो शैक्षणिक स्तर काफी अच्छा है,  किंतु इसमें नवाचार की आवश्यकता महसूस हो रही हैं। हाल ही में कई प्रतिभाओं ने अपने शैक्षणिक ज्ञान और कौशल के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्र में समाज व देश का नाम रोशन किया। जिसमें रवि विश्नोई (क्रिकेटर), श्री रोहताश खिलेरी (पर्वतारोही), सुश्री पूजा विश्नोई (धावक), सुश्री नीतू विश्नोई (कबड्डी), श्री रमन विश्नोई (क्रिकेटर) ने अपना-अपना कौशल दिखाते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किया है।

रवी बिशनोई


पूजा बिशनोई

इस प्रकार शिक्षा के माध्यम से परिवार कल्याण के साथ-साथ समाज को नयी ऊंचाई प्रदान कर सकते हैं। जिससे सम्पूर्ण समाज गोरवान्वित महसूस कर सकें।

लेखक -  कैलाश धेतरवाल जोगाऊ 

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